देसीटून्ज़

जनवरी 25, 2007

किसकी, कैसी गरीबी?

Filed under: आदम और हव्वा..., सामाजिक — raviratlami @ 2:33 अपराह्न

आदम और हव्वा… 

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5 टिप्पणियाँ »

  1. तीखा और कचोटता व्यंग्य-चित्र

    टिप्पणी द्वारा Pratik Pandey — जनवरी 25, 2007 @ 5:35 अपराह्न

  2. बढ़िया है रवि भाई. सही व्यंग्य.

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल — जनवरी 25, 2007 @ 7:17 अपराह्न

  3. मारा तीर निशाने पर

    टिप्पणी द्वारा संजय बेंगाणी — जनवरी 26, 2007 @ 5:22 पूर्वाह्न

  4. मतलब कि ग़रीब, ग़रीब ही रहे – अमीर, और ज़्यादा अमीर हो गए।

    टिप्पणी द्वारा SHUAIB — जनवरी 26, 2007 @ 5:25 पूर्वाह्न

  5. janwaro ka chara jab nahi bach pata to garibo ke hak ki kya ?

    टिप्पणी द्वारा sher bahadur singh — जुलाई 21, 2011 @ 10:36 पूर्वाह्न


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