आदम और हव्वा…
जितना बड़ा अफ़सर उतनी ही बड़ी लिप्सा
नही भाई अब यहा टिपिया कर भारत सरकार अफ़सरो से पंगो नही
Comment by अरुण — April 30, 2007 @ 8:30 am
हुम्म्म्
Comment by dhurvirodhi — April 30, 2007 @ 11:30 am
मेरे एक मित्र की गज़ल का एक शेर है:
बीबियाँ माध्यम बनी जिनके प्रमोशन की उन अफसरोँ के पद नही हम ‘वंश’ देखेंगे.
देसी टूंस की पैनी नज़र है, बनाये रखेँ.
अरविन्द चतुर्वेदी
Comment by Arvind Chaturvedi — April 30, 2007 @ 12:02 pm
Comment by श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' — April 30, 2007 @ 10:41 pm
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नही भाई अब यहा टिपिया कर भारत सरकार अफ़सरो से पंगो नही
Comment by अरुण — April 30, 2007 @ 8:30 am
हुम्म्म्
Comment by dhurvirodhi — April 30, 2007 @ 11:30 am
मेरे एक मित्र की गज़ल का एक शेर है:
बीबियाँ माध्यम बनी जिनके प्रमोशन की
उन अफसरोँ के पद नही हम ‘वंश’ देखेंगे.
देसी टूंस की पैनी नज़र है, बनाये रखेँ.
अरविन्द चतुर्वेदी
Comment by Arvind Chaturvedi — April 30, 2007 @ 12:02 pm
Comment by श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' — April 30, 2007 @ 10:41 pm