आदम और हव्वा…
Comment by जगदीश भाटिया — December 30, 2006 @ 6:12 am
….और कार्टून बनाना..
Comment by संजय बेंगाणी — December 30, 2006 @ 8:58 am
“सब चलता है” जैसे स्वर्णिम वाक्य के उपयोग पर रोक लगाना उचित नहीं है. यह नहीं बोल पायेंगे, तो क्या बोलेंगे? क्या सब मौन धर लें?
Comment by समीर लाल — December 30, 2006 @ 4:11 pm
सही है सब चलता है।
Comment by Shrish — December 31, 2006 @ 7:49 pm
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Comment by जगदीश भाटिया — December 30, 2006 @ 6:12 am
….और कार्टून बनाना..
Comment by संजय बेंगाणी — December 30, 2006 @ 8:58 am
“सब चलता है” जैसे स्वर्णिम वाक्य के उपयोग पर रोक लगाना उचित नहीं है. यह नहीं बोल पायेंगे, तो क्या बोलेंगे? क्या सब मौन धर लें?
Comment by समीर लाल — December 30, 2006 @ 4:11 pm
सही है सब चलता है।
Comment by Shrish — December 31, 2006 @ 7:49 pm