आदम और हव्वा…
अब समझा , आज बॉस क्यों बहुत गुर्रा रहा था… आज डेड लाइन जो था…
बोत सई फरमाया जी।
यह थीम बदलिए जी, एक तो Header इमेज बहुत बड़ी है और Reading Area बीच में सिमटा हुआ है।
Comment by Shrish — December 29, 2006 @ 10:18 am
आज मूड ठीक नहीं इसलिए टिप्पणी कर रहा हूँ, वरना तो ही ही कर निकल लेता.
Comment by संजय बेंगाणी — December 29, 2006 @ 12:17 pm
आज वाकई मुड़ अच्छा है, वरना तो…..आप जानते हैं, आता जरुर और कुछ न कुछ टिप्पणी भी करता.
Comment by समीर लाल — December 29, 2006 @ 1:36 pm
“..यह थीम बदलिए जी, एक तो Header इमेज बहुत बड़ी है और Reading Area बीच में सिमटा हुआ है।…”
देबाशीष, सुन रहे हैं ना?
Comment by रवि — December 29, 2006 @ 2:33 pm
ji nahi aaj mood nahi hai kuch likhne ka
Comment by dhami — April 8, 2007 @ 6:07 pm
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बोत सई फरमाया जी।
यह थीम बदलिए जी, एक तो Header इमेज बहुत बड़ी है और Reading Area बीच में सिमटा हुआ है।
Comment by Shrish — December 29, 2006 @ 10:18 am
आज मूड ठीक नहीं इसलिए टिप्पणी कर रहा हूँ, वरना तो ही ही कर निकल लेता.
Comment by संजय बेंगाणी — December 29, 2006 @ 12:17 pm
आज वाकई मुड़ अच्छा है, वरना तो…..आप जानते हैं, आता जरुर और कुछ न कुछ टिप्पणी भी करता.
Comment by समीर लाल — December 29, 2006 @ 1:36 pm
“..यह थीम बदलिए जी, एक तो Header इमेज बहुत बड़ी है और Reading Area बीच में सिमटा हुआ है।…”
देबाशीष, सुन रहे हैं ना?
Comment by रवि — December 29, 2006 @ 2:33 pm
ji nahi aaj mood nahi hai kuch likhne ka
Comment by dhami — April 8, 2007 @ 6:07 pm