सही है!! अब क्या करेंगे??
Comment by समीर लाल — November 27, 2006 @ 12:16 am
अच्छा व्यंग्य. अति बहुत बुरे परिणाम लेकर आती है, प्राणी अत्याचार के प्रति मेनकाजी का रूख भी अति की सीमा में जाने लगा है.
Comment by संजय बेंगाणी — November 27, 2006 @ 5:07 am
मेनका की मिन-मिन से अभी भी लोग प्रभावित होते है, अचरज है।
Comment by ratna — November 28, 2006 @ 7:11 am
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सही है!! अब क्या करेंगे??
Comment by समीर लाल — November 27, 2006 @ 12:16 am
अच्छा व्यंग्य.
अति बहुत बुरे परिणाम लेकर आती है, प्राणी अत्याचार के प्रति मेनकाजी का रूख भी अति की सीमा में जाने लगा है.
Comment by संजय बेंगाणी — November 27, 2006 @ 5:07 am
मेनका की मिन-मिन से अभी भी लोग प्रभावित होते है, अचरज है।
Comment by ratna — November 28, 2006 @ 7:11 am